शिक्षक दिवस और डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन की जन्मदिन की बधाई!(5th September 2020 happy teacher's day)

Madhwapur, madhubani 

Kishun bhaijee ने दी शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई! 

टीचर्स डे शिक्षकों की प्रशंसा करने का स्पेशल दिन है। इस दिन विद्यार्थी अपने टीचर को गिफ्ट देते हैं। भारत में शिक्षक दिवस 1962 से 5 सितंबर को डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्णन की जन्मदिन को टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है।

शिक्षाक दिवस (teacher's day) क्यों मनाया जाता है:

इस दिन महान शिक्षा वादी और भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था। उन्हीं की याद में टीचर डे मनाया जाता है।

उनका मानना था कि, शिक्षक का दिमाग देश में सबसे बेहतर दिमाग होता है। डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन बहुत अच्छे शिक्षक और दार्शनिक थे।

एक बार उनके कुछ विद्यार्थी और दोस्तों ने उनसे कहा कि, वह उनके जन्मदिन को सेलिब्रेट करना चाहते हैं। तब उन्होंने कहा था कि,

"मेरा जन्मदिन अलग से मनाने के बजाए अगर मेरा जन्मदिन टीचर्स डे के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा।"



इसके बाद आज तक 5 सितंबर को डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हम इस महान शिक्षावादी को याद करते हैं और अपने सभी शिक्षकों को सम्मानपूर्वक धन्यवाद देते हैं।

डॉ राधाकृष्णन का शिक्षा के प्रति बहुत बड़ा योगदान है इसी वजह से आज तक इंडिया में यह दिन मनाया जाता है। शिक्षक एक ऐसा व्यक्ति होता है जो हमें दुनिया के साथ सही-गलत का अंतर बताता है।

भारत में टीचर्स डे महान शिक्षा वादी डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को याद करने के लिए और अपने शिक्षकों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।

एक शिक्षक अपने विद्यार्थी से कोई भी उम्मीद रखे बिना अपनी पूरी जिंदगी ज्ञान बांटने में लगा देता है। इसलिए सभी शिक्षकों को धन्यवाद कहने के लिए शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

टीचर्स डे शिक्षकों का समाज में सम्मान बढ़ाने के लिए और शिक्षकों का उनके काम के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

एक शिक्षक की हमारे जीवन में क्या जरूरत है, क्या खासियत है, हम उनके बारे में क्या सोचते हैं, उनके प्रति हमारी भावनाएं कैसी हैं, यह बताने के लिए teachers day मनाया जाता है।

एक शिक्षक का काम हमें सही रास्ता दिखाना होता है। हमारे शिक्षक हमें सही-गलत क्या है? वो समझाते हैं। शिक्षक पूरी जिंदगी ज्ञान बांटने में लगा देता है। इन्हीं शिक्षकों के ऊपर पूरे देश का भविष्य निर्भर करता है।

गुरु अपने शिष्य का कभी भी बुरा नहीं सोच सकते हैं इसलिए ही शायद ईश्वर से पहले गुरु का नाम लिया जाता है। आज आप और हम जो कुछ भी हैं वो हमारे शिक्षकों की मेहनत की बदौलत है।

अगर आप एक सही इंसान भी होंगे तो वह आपकी जिंदगी के पहले गुरू मां-बाप या फिर आपके कोई अपने ही होंगे। शिक्षक सिर्फ वह नहीं है जो हमें पढ़ना लिखना सिखाएं, टीचर वह भी है जिससे आपने कुछ अच्छा और नया सिखा हो। आप उन लोगों के साथ भी शिक्षक दिवस मना सकते हैं।

शिक्षक दिवस स्कूल में कैसे मनाया जाता है 

टीचर्स डे स्कूल और कॉलेज में बहुत अच्छे से मनाया जाता है। इस दिन टीचर्स को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती है। इस दिन स्टूडेंट को सब कुछ टीचर के लिए करना होता है जो शिक्षक ने आज तक विद्यार्थी के लिए किया होता है।

इस दिन स्टूडेंट अपने पसंदीदा टीचर को कोई अच्छी गिफ्ट देते हैं। इस दिन विद्यार्थी शिक्षक का किरदार निभाते हैं। शिक्षक की good quality सब के साथ बाँटते है। शिक्षक के बारे में अच्छी बातें लिखकर टीचर को गिफ्ट के तौर पर देते हैं।

इस दिन स्टूडेंट्स शिक्षकों को सम्मान देकर उनका मनोबल बढ़ाते हैं, जिससे शिक्षक अपने विद्यार्थियों को और अच्छे से पढ़ाते हैं।

आप जिसको अपना सबसे अच्छा शिक्षक समझते हैं, जिससे आपको अच्छी सीख मिली हो। अपने उस favorite teacher को teachers डे के दिन गिफ्ट देकर उसका सम्मान जरूर बढ़ाएं।

शिक्षक का महत्व :

जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है. शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. प्राचीन काल से ही गुरुओं का हमारे जीवन में बड़ा योगदान रहा है. गुरुओं से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन से ही हम सफलता के शिखर तक पहुंच सकते हैं. शिक्षक दिवस पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है. क्या आप जानते हैं कि शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

5 September को ही आखिर क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस 

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर उनकी स्मृति में सम्पूर्ण भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जाता है. वह एक महान शिक्षक होने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपती तथा दूसरे राष्ट्रपति थे. गुरु का हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है और इसलिए कहा गया है कि

Dr. Sarvepalli Radhakrishnan कौन थे 

सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे और शिक्षा में उनका काफी लगाव था, इसलिए सम्पूर्ण भारत में सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अच्चा करने वाले छात्रों को पुरस्कार दिया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि गुरु अर्थार्त शिक्षक के बिना सही रास्तों पर नहीं चला जा सकता है. वह मार्गदर्शन करते है. तभी तो शिक्षक छात्रों को अपने नियमों में बांधकर अच्चा इंसान बनाते हैं और सही मार्ग प्रशस्त करते रहते है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि जन्म दाता से बढकर महत्व शिक्षक का होता है क्योंकि ज्ञान ही इंसान को व्यक्ति बनाता है, जीने योग्य जीवन देता हैं


Dr. Sarvepalli Radhakrishnan की बचपन :

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 में तमिलनाडु के तिरुतनी गॉव में एक गरीब परिवार में हुआ था. आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पढाई-लिखाई में उनकी काफी रुची थी. आरंभिक शिक्षा इनकी तिरूवल्लुर के गौड़ी स्कूल और तिरूपति मिशन स्कूल में हुई थी. फिर मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से उन्होंने अपनी पढाई पूरी की थी. 1916 में उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला. 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह 1903 में सिवाकामु के साथ हो गया था. वर्ष 1954 में शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए उन्हें भारत सम्मान से नवाजा गया.

हम आपको बता दें कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपने जीवन के 40 साल अध्यापन को दिए थे. उनका मानना था कि बिना शिक्षा के इंसान कभी भी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता है. इसलिए इंसान के जीवन में एक शिक्षक होना बहुत जरुरी है.

भारत में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद राधाकृष्णन को जवाहरलाल नेहरु ने राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करने का आग्रह किया. 1952 तक वह इसी पद पर रहे और उसके बाद उन्हें उपराष्ट्रपती नियुक्त किया गया. राजेन्द्र प्रसाद का कार्यकाल 1962 में समाप्त होने के बाद उनको भारत का दूसरा राष्ट्रपति बनाया गया. 17 अप्रैल 1975 में लंबे समय तक बीमार रहने के बाद उनका निधन हो गया.  

भारत में शिक्षक दिवस कैसे मनाया जाता है

इस दिन स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती हैं, उत्सव, कार्यक्रम आदि होते हैं. शिक्षक अपने टीचर्स को गिफ्ट देते हैं. कई प्रकार कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती है जिसमे छात्र और शिक्षक दोनों ही भाग लेते है. गुरु-शिष्य परम्परा को कायम रखने का संकल्प लेते हैं.

यह दिन शिक्षक और छात्रों अर्थार्थ यू कहें तो समाज के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. इसी दिन शिक्षको को मान-सम्मान देकर उनके काम की सराहना करते है. एक शिक्षक के बिना कोई भी डॉक्टर, इंजीनियर आदि नहीं बन सकता है. शिक्षा का असली ज्ञान सिर्फ एक शिक्षक ही दे सकता है.

शिक्षक दिवस को मनाने कि तिथियां अलग-अलग देशों में भिन्न हैं. क्या आप जानते हैं कि यूनेस्को ने आधिकारिक रूप में 'शिक्षक दिवस' को मनाने के लिए 5 अक्टूबर को चुना. अब इसलिए 100 से अधिक देशों में यह 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है.

अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि 5 सितंबर का दिन डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में ही नहीं बल्कि शिक्षकों के प्रति सम्मान और लोगों में शिक्षा के प्रति चेतना जगाने के लिए भी मनाया जाता है.


उम्मीद करते हैं कि आप भी अपने गुरु से बहुत प्यार करते होंगे,, जीवन मे गुरु का महत्व को भुलना नहीं चाहिए.. 

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