International labourday

                 मजदूरों के लिए दो शब्द



जो दिन में कमाता हू,⁣
वही शाम को खाता हू।⁣
⁣
मिट्टी को पहनता,⁣
धूप से नहाता हू।⁣
⁣
गश्ती-फावड़ा, हथोड़ा-छैनी,⁣
जो जरूरत बन जाता हू।⁣
⁣
परेशानियों से रोज,⁣
में हाथ मिलाता हूं।⁣
⁣
थक जाने के बाद भी,⁣
थका नहीं बताता हू।⁣
⁣
मौसम कोई भी हो,⁣
आसमां ओढ़,सो जाता हूं।⁣
⁣
चूल्हे से भी ज्यादा,⁣
खुद को में जलाता हू।⁣
⁣
कोई मेरे पास नहीं आता,⁣
भूत नहीं,भूख से डराता हू।⁣
⁣
पसीना डालकर,⁣
ख्वाबों को उगाता हू।⁣
⁣
ख्वाब पूरे नहीं होते,⁣
और में जग जाता हू।⁣
⁣
मुझसे भूख भी डर जाती,⁣
जब मे पानी को खाता हू।⁣
⁣
कल वक्त बदलेगा,⁣
यही गीत गुनगुनाता हू।⁣
⁣
खैर छोड़ो,अपनी नज्म सुन,⁣
मैं भी कपकपाता हू।⁣
⁣
मैं कौन हू? इंसान, नहीं।⁣
मे तो मजदूर कहलाता हू।⁣

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