बिहार बोर्ड रिजल्ट 2020
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना
matric results 2020
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जीवन में कठिनाइयाँ हमे बर्बाद करने नहीं आती है, बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करती है| कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप उससे भी ज्यादा कठिन हो।
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बारिश की दौरान सारे पक्षी आश्रय की तलाश करते है लेकिन बाज़ बादलों के ऊपर उडकर बारिश को ही अवॉयड कर देते है। समस्याए कॉमन है, लेकिन आपका नजरिया (एटीट्यूड –Attitude) इनमे डिफरेंस पैदा करता है।
संचालक किशुन भाईजी
प्रिंस कुमार और उत्तीर्ण सभी स्टूडेंट को बहुत बहुत देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ इसी तरह आगे बढ़ते रहे
नकारात्मक सोच से दूर रहे-
रिजल्ट खराब होने पर बच्चे तनाव में आ जाते हैं और सिर्फ अपने बारे में सोचकर गलत कदम उठा लेते हैं। वे ये नहीं सोचते कि इससे उनके माता-पिता पर क्या बीतेगी। उनके भाई-बहन पर क्या बीतेगी, जो उनके जीवन से जुड़े होते हैं, उनकी हर खुशी और गम में उनके साथ खड़े होते हैं।
रिजल्ट से पहले हर बच्चा तनाव में होता है। चाहे वो पढ़ने में तेज हो या कमजोर।ऐसे में पैरेंट्स को बच्चे पर हर पल नजर रखनी चाहिए। रिजल्ट से पहले बच्चों का तनाव दूर करने की कोशिश करें। हो सके तो उनके साथ कोई गेम खेलें। रिजल्ट जारी होने की घोषणा के बाद या रिजल्ट जारी होने वाले दिन यदि बच्चे के व्यवहार में किसी तरह का गंभीर बदलाव नजर आए तो उसे इग्नोर कतई न करें। बच्चा अगर मजाक में भी कह रहा है कि रिजल्ट अच्छा नहीं आने पर वह आत्महत्या कर लेगा या घर नहीं आएगा तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत उसे समझाएं। महान हस्तियों के उदाहरण देकर उन्हें समझाएं कि एक रिजल्ट अगर बुरा आ भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। इम्तिहान तो जिंदगीभर चलते रहेंगे।
रिजल्ट आने से पहले अक्सर पैरेंट्स बच्चे के एडमिशन या इससे जुड़ी अन्य बातें करने लगते हैं। अगर इतना प्रतिशत आएगा तो इस कॉलेज में एडमिशन मिलेगा, इस तरह की बातें न करें। प्रतिशत के लिए न डाटें। रिजल्ट आने के बाद अगर वह खराब है या जैसा सोचा वैसा नहीं है तो बच्चे को विश्वास में लें और उसे समझाएं कि यहां से एक नई मंजिल उसका इंतजार कर रही है। रिजल्ट आने के बाद बच्चे के व्यवहार में हो रहे बदलावों पर भी पैरेंट्स को नजर रखनी चाहिए। क्योंकि रिजल्ट के बाद के कुछ घंटे बेहद संवेदनशील होते हैं। संभव है कि बच्चा इस मसले पर कोई बात न करना चाहता हो, जिससे कि वह मानसिक रूप से और परेशान हो जाए। ऐसे में बार-बार रिजल्ट की बात करना ठीक नहीं होगा। खराब रिजल्ट आने पर बच्चे को लगता है कि वे माता-पिता की इच्छा को पूरी नहीं कर पाए। ऐसे में माता-पिता को उन्हें तनाव से निकालना चाहिए।



Gd
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